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Showing posts from July, 2020
गुरुपौर्णिमा गुरुपौर्णिमा की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ !!! मैंने यह कविता 2015 के गुरुपौर्णिमा के अवसर पर  अपने बेटे नहुष के गुरुओं के लिए लिखी थी l गुरू हमारे मातापिता होते हैं हमारे गुरू और गुरू होते हैं हमारे शिक्षक इनके बिना अधूरा है हमारी जिंदगी का कथानक l जब छोटे थे तब, माँ बनी पहली गुरू l जिंदगी में कठिनाइयां आनी हुईं शुरु, तो पिताजी बने गुरू l स्कूल और कॉलेज में मिले, शिक्षक के रूप में गुरू l ईन सबके के कारण जिंदगी की नाव, सुरक्षित तैरना हुई शुरु l इतना ही नहीं तो, संगीत और खेल के मैदान में भी मिले गुरू l यह सब बने खेवट, मेरी जिंदगी की नाव के l मैंने भी कर दी, अपनी नाव हवाले इनके l इनके बताये हुए रास्ते पर, चलने की है मैंने ठानी l नहीं करूँगा इनके आगे, कभी अपनी मनमानी l गुरुपूर्णिमा के इस पावन अवसर पर अपने सारे गुरुओं को मैं तहे दिल से याद करता हूँ और आप सभी के चरणों में अपना सादर प्रणाम करता हूँ l🙏🙏 - वैशाली
कोरोना आपण आपल्या आयुष्यात इतके होतो व्यस्त🙆‍♀️ की वेळच नव्हता करायला कोणाची वास्तपुस्त😔 निसर्गालाही किती करवून ठेवले होते त्रस्त😪 म्हणूनच मिळालीय कोरोनारूपी शिक्षा सक्त😷 उन्मत्त मानवाला बसलीय चपराक जबरदस्त👊 कोरोनाने दिलेय मानवाच्या आणून लक्षात🤨 तुम्ही इथले मालक नाही पाहुणे आहात फक्त!👜 ✍️वैशाली